अंधेरे के रास्ते - भाग 10 Writer: Lucky Thakur रवीना और सिमा का सफर जारी था। वे अब उस अंधेरे गुफा से बाहर आ चुकी थीं, जहां उन्होंने अपनी सबसे बड़ी लड़ाई लड़ी थी। लेकिन यह यात्रा सिर्फ एक अदृश्य शक्ति से बचने तक ही सीमित नहीं थी, बल्कि अब वे एक नए और अनजाने रास्ते पर चल रही थीं, जो उन्हें अपने भीतर की ताकत और जीवन के अर्थ से परिचित कराता। उन्होंने अपनी यात्रा के दौरान जो कुछ भी सीखा था, वह उन्हें अब अपने जीवन के अगले चरण में लागू करना था। अब उनका सामना न केवल बाहरी दुनिया से था, बल्कि अपनी अंदर की दुनिया से भी था। "सिमा, क्या तुम भी यह महसूस कर रही हो कि इस रास्ते पर हमें अकेला नहीं छोड़ा गया है?" रवीना ने सिमा से पूछा, जो कुछ दूर चलने के बाद रुक गई थी और चारों ओर की चुप्पी में खो गई थी। "हाँ, रवीना," सिमा ने सिर झुका लिया, "मुझे भी ऐसा ही लगता है। ऐसा लगता है जैसे कोई हमारी निगरानी कर रहा है। और यह डरावना नहीं, बल्कि कुछ ऐसा है जो हमें बताना चाहता है कि हमारी यात्रा अभी खत्म नहीं हुई है।" सिमा की बातों ने रवीना को चौंका दिया, क्योंकि ठीक उसी समय उसने भी मह...
सच का सामना – भाग 4 लेखक - लकी ठाकुर कृष्णा ने अपनी आँखों में दृढ़ता और साहस भरकर घड़ी को अपनी मुट्ठी में कसकर पकड़ा। उसके हाथों में यह छोटी सी घड़ी अब एक विशाल दायित्व का प्रतीक बन चुकी थी। जैसे-जैसे वह दरवाजे के पास बढ़ रही थी, उसके दिल की धड़कन तेज हो रही थी। उसके मन में असंख्य सवाल थे, लेकिन एक सवाल उससे ज्यादा जोर से उठ रहा था - क्या वह इस रहस्य को सुलझा पाएगी? वह व्यक्ति, जिसने कृष्णा को इस दुनिया में लाया था, अब उसके पास खड़ा था और धीरे से बोला, "तुम्हारी यात्रा की सबसे बड़ी परीक्षा अब शुरू होने वाली है। जो तुम्हारे दादा ने शुरू किया था, वह तुम्हें खत्म करना होगा। लेकिन याद रखना, यह सिर्फ एक कदम नहीं है, यह पूरा रास्ता है।" कृष्णा ने उसे नज़रअंदाज़ किया और दरवाजे की ओर कदम बढ़ाए। दरवाजे के पास पहुँचते ही घड़ी की सुइयां अपने आप गति पकड़ने लगीं। अचानक दरवाजा खुलने की आवाज़ आई और सामने एक धुंधली सी दुनिया उभरने लगी। यह दुनिया बिल्कुल अलग थी—यह एक भूतपूर्व युग की तरह थी, जहाँ घड़ी के टिक-टिक की आवाज के अलावा कोई और ध्वनि नहीं सुनाई दे रही थी। कृष्णा ने गहरी सांस ली और दरवा...