सन्नाटे के बीच – भाग 2
लेखक: लकी ठाकुर
राहुल अब हवेली के भीतर पूरी तरह से घेर लिया गया था। उसकी आँखों में डर और बेचैनी का मिश्रण था। वह समझ नहीं पा रहा था कि जो कुछ भी हो रहा था, वह वास्तविक था या सिर्फ उसका डर और भ्रम। लेकिन एक बात तो साफ थी—उसने कभी सोचा भी नहीं था कि उसका अतीत इतना पेचीदा और रहस्यमय होगा।
आईने में वह अजनबी, जो अब तक उसकी छाया बनकर उसके साथ चल रहा था, अचानक गायब हो गया। राहुल के दिल में एक और डर समा गया था। वह जानता था कि उसे जवाब चाहिए थे—आखिर वह अजनबी कौन था और वह हवेली किससे जुड़ी हुई थी?
राहुल ने हवेली के भीतर और खोजने का मन बनाया। उसकी नजरें हर कोने में घुसी हुई थीं, जैसे कोई भी छिपा हुआ राज़ उसकी पकड़ से बाहर न जा सके। वह अपने कदम धीरे-धीरे बढ़ाता हुआ एक और कमरे में पहुँचा। इस कमरे में एक पुराना लकड़ी का शेल्फ रखा था। शेल्फ पर बहुत सारी किताबें रखी हुई थीं, लेकिन एक किताब को देख, राहुल के हाथ रुक गए। वह किताब बिल्कुल नई लग रही थी, जैसे उसे हाल ही में रखा गया हो।
राहुल ने उस किताब को उठाया और उसके पन्ने पलटने लगा। किताब के पहले पन्ने पर कुछ लिखा हुआ था:
"तुम जब यह किताब पढ़ोगे, तो तुम वह सब जान सकोगे जो तुम्हारे साथ कभी हुआ था। लेकिन इस ज्ञान के बदले, तुम्हें एक बड़ी कीमत चुकानी होगी।"
राहुल का दिल तेज़ी से धड़कने लगा। उसे समझ में नहीं आया कि वह क्या करें। क्या वह इस किताब को पढ़े या फिर हवेली छोड़ दे? लेकिन फिर एक अजीब सी आवाज़ सुनाई दी, "तुम्हारे सवालों के जवाब इसी किताब में हैं, राहुल।"
राहुल ने किताब खोली और पढ़ना शुरू किया। पहले पन्ने पर लिखा था:
"राहुल, तुम्हारा अतीत छिपा हुआ है, और तुम ही वह कुंजी हो जो इस रहस्य को खोल सकती है। तुम्हें अपना परिवार ढूँढ़ना होगा। तुम्हारी पहचान तुम्हारी यादों में बसी हुई है, लेकिन याद रखो, यह रास्ता आसान नहीं होगा। तुम जिस अतीत को खोजने निकलोगे, वह तुम्हारे सामने खतरे की दीवार के रूप में आएगा।"
जैसे-जैसे राहुल किताब के पन्ने पलटता गया, वह महसूस कर रहा था कि हर शब्द उसे उसके अतीत के करीब ले जा रहा था। किताब में और भी कई राज़ छिपे थे। एक पन्ने पर लिखा था:
"तुम्हारी माँ की मौत के बाद तुमने सब कुछ भूलने की कोशिश की थी, लेकिन अब तुम्हें सब याद करना होगा। तुम्हारे बचपन के वो पल, तुम्हारे वो दोस्त, और वह हवेली—यह सब तुम्हारे जीवन के सबसे बड़े राज़ से जुड़े हुए हैं।"
राहुल की आँखों में आंसू थे। उसने कभी नहीं सोचा था कि उसके अतीत में इतनी गहरी और खौ़फनाक कहानी छिपी होगी। उसकी माँ की मौत, उसका बचपन—सारी यादें अब धुंधली पड़ चुकी थीं। क्या वह सच में इन यादों को फिर से खोजना चाहता था? क्या उसे अतीत के घावों को फिर से छेड़ना चाहिए?
तभी किताब के आखिरी पन्ने पर कुछ लिखा था:
"तुम्हें उस अजनबी को ढूँढ़ना होगा, जो तुम्हारे जीवन का हिस्सा था। वह अजनबी तुम्हारे अतीत का सबसे बड़ा राज़ है। यदि तुम उसे ढूँढ़ सको, तो तुम्हें अपने सबसे बड़े सवाल का जवाब मिल जाएगा।"
राहुल ने किताब को बंद किया और अंदर से एक गहरी आह भरी। अब वह जानता था कि उसे आगे क्या करना था। अजनबी को ढूँढ़ने के अलावा अब उसके पास कोई और रास्ता नहीं था।
राहुल ने हवेली के अंदर अपनी खोज जारी रखी। धीरे-धीरे वह कमरे-कमरे में घूमता गया। उसे कहीं कोई आहट सुनाई देती थी, कहीं दरवाजे खुद-ब-खुद बंद हो जाते थे। हवेली में कुछ और भी था, जो उसे महसूस हो रहा था, लेकिन वह जानता था कि उसे अपनी खोज को जारी रखना होगा।
आखिरकार, एक कमरे में उसे एक पुराना फ़ोटोग्राफ मिला। यह वही अजनबी था, वही चेहरा। लेकिन तस्वीर में वह अजनबी राहुल के साथ खड़ा था, और दोनों की आँखों में डर और चिंता साफ नजर आ रही थी। यह तस्वीर क्या बताती थी? क्या वह अजनबी उसकी मदद करने आया था या उसे किसी गहरे जाल में फंसा दिया था?
जैसे ही राहुल ने तस्वीर को और ध्यान से देखा, उसे तस्वीर के पीछे कुछ लिखा हुआ दिखा। उसने पीछे से लिखा हुआ संदेश पढ़ा:
"तुम दोनों की पहचान जुड़ी हुई है, लेकिन तुम भूल चुके हो कि तुम्हारी असली यात्रा अभी शुरू होनी है।"
यह पढ़ते ही राहुल का दिल जैसे रुक गया। क्या मतलब था इस संदेश का? क्या वह अजनबी सच में उसकी मदद करने आया था या वह उसके सामने एक बड़ी चुनौती थी?
राहुल की उलझन बढ़ चुकी थी। वह जानता था कि उसके पास अब कोई और रास्ता नहीं था। उसे अपनी पहचान, अपने अतीत को जानने के लिए और भी गहरे जाना होगा। लेकिन क्या वह सही रास्ता चुन रहा था या वह एक और जाल में फंसने जा रहा था?
सवाल अब और भी जटिल हो चुके थे, और राहुल की यात्रा का सबसे खतरनाक मोड़ अभी आना बाकी था।
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