सन्नाटे के बीच – भाग 4
लेखक: लकी ठाकुर
राहुल ने जैसे ही उस अंधेरे जंगल की ओर कदम बढ़ाया, उसे महसूस हुआ कि वह किसी बड़ी यात्रा पर निकल चुका है। यह जंगल, जो हवेली के पीछे छिपा हुआ था, उसे पूरी तरह से अलग महसूस करवा रहा था। चारों ओर सन्नाटा था, बस पत्तों की सरसराहट और दूर कहीं से आती हुई रहस्यमय आवाज़ें सुनाई दे रही थीं। यह आवाज़ें जैसे उसे किसी और दुनिया में खींच रही थीं, लेकिन वह अब पीछे नहीं हट सकता था।
"तुम समझ गए हो न राहुल?" वही अजनबी की आवाज़ फिर से गूंज उठी। "यह जंगल तुम्हारे भीतर के डर का प्रतीक है। अगर तुम इस जंगल को पार कर पाओ, तो तुम अपने अतीत को भी पहचान सकोगे।"
राहुल की धड़कनें तेज़ हो गईं। वह जानता था कि यह जंगल सिर्फ एक भौतिक स्थान नहीं था, बल्कि यह उसके भीतर की उलझनों और डर का प्रतीक था। वह अपने डर से लड़कर ही अपनी पहचान को जान सकता था, और यही उसकी यात्रा का सबसे बड़ा टेस्ट था।
उसने गहरी सांस ली और आगे बढ़ने लगा। जंगल के बीच से गुजरते हुए उसने देखा कि पेड़ों की शाखाएँ एक-दूसरे से मिलकर अजीब-सी दीवार बना रही थीं। यह दीवार जैसे एक रास्ते को छुपा रही थी। राहुल को महसूस हुआ कि यह दीवार उसका रास्ता रोकने के लिए बनी थी, लेकिन वह उस दीवार को पार करने का मन बना चुका था।
वह धीरे-धीरे उस दीवार की ओर बढ़ा और जैसे ही उसने एक शाखा को हटाया, उसे एक पुराना रास्ता दिखा। यह रास्ता बहुत संकीर्ण था और एक तरफ की दीवारों से ढंका हुआ था। यह रास्ता अजीब तरह से उसके दिल की धड़कन को तेज कर रहा था।
"तुम इसे पार नहीं कर सकते, राहुल," अजनबी की आवाज़ फिर से गूंज उठी। "तुमने पहले भी कोशिश की थी, लेकिन तुम लौट आए थे। तुम्हारे भीतर वह डर था, जो अब भी तुम्हारे साथ है।"
राहुल ने जोर से अपने कदम बढ़ाए और कहा, "मैं अब डर नहीं रहा। मैं अपने अतीत का सामना करूंगा।"
उसने रास्ते में आगे बढ़ते हुए देखा कि दीवार के बीच कुछ पुरानी चीज़ें पड़ी थीं—कुछ पुराने कागज, किताबें और तस्वीरें। एक तस्वीर पर उसकी नजरें ठहर गईं। यह वही तस्वीर थी, जिसमें वह अजनबी और राहुल साथ खड़े थे। उस तस्वीर के पीछे कुछ लिखा था:
"यह वह जगह है जहाँ तुम और मैं मिलकर अपनी यात्रा को पूरा करेंगे, राहुल। लेकिन इसका अर्थ जानने के लिए तुम्हें पूरी सच्चाई का सामना करना होगा।"
राहुल का दिल एक बार फिर से धड़कने लगा। क्या वह उस अजनबी के साथ अपने अतीत को जान पाएगा? क्या यह सचमुच उसकी पहचान से जुड़ा हुआ था?
वह तेजी से आगे बढ़ा, लेकिन जैसे-जैसे वह बढ़ रहा था, जंगल और भी घना हो रहा था। हर कदम के साथ, राहुल के अंदर एक अजीब सा भय महसूस होने लगा, जैसे कुछ गलत होने वाला हो। जंगल के बीच एक झरने की आवाज़ आई, और राहुल ने देखा कि झरना पास में था। झरने के पास पहुंचते ही उसने देखा कि पानी में कुछ चमक रहा था। यह वही चीज़ थी जिसे वह महसूस कर रहा था—कुछ छिपा हुआ, जिसे उसे ढूँढ़ना था।
राहुल ने झरने के पास जाकर पानी में झाँका। वहां एक पुराना संदूक रखा था। उसने संदूक खोला और अंदर देखा। संदूक में एक पुराना पैकेट था, जिस पर लिखा था: "तुमने इसे खो दिया था, राहुल। अब यह तुम्हारे पास है, और यह तुम्हारे अतीत का राज़ खोलने में मदद करेगा।"
राहुल ने पैकेट खोला और उसमें से एक पुराना पत्र निकाला। पत्र को खोलते ही उसने पढ़ा:
"राहुल, यह वह जगह है जहाँ तुम्हारे सारे सवालों का जवाब छिपा हुआ है। तुम्हारे जीवन में एक मोड़ था, जिसको तुम भूल चुके हो। वह अजनबी कोई और नहीं, बल्कि तुम्हारा बचपन का दोस्त था, जिसे तुम भूल चुके हो। तुम्हारी माँ की मौत के बाद तुमने उसे छोड़ दिया, लेकिन अब तुम्हें उसे फिर से याद करना होगा। वह तुम्हारे साथ है, तुम्हारे अतीत में, और तुम्हारी यात्रा को पूरा करने में तुम्हारी मदद करेगा।"
राहुल का दिल जोर से धड़कने लगा। वह अजनबी, जो उसे हमेशा से डराता आ रहा था, वह उसका बचपन का दोस्त था। उसे अब यह समझ में आ चुका था कि उसके अतीत से जुड़ी सारी यादें उसके सामने थीं, लेकिन वह उन्हें भूल चुका था।
तभी, जैसे ही वह पत्र को अपने हाथ में पकड़े हुए था, उसने देखा कि झरने के पास एक नया रास्ता खुल रहा था। यह रास्ता बिल्कुल अजनबी था, जैसे वह उसे ही बुला रहा हो। राहुल को महसूस हुआ कि यह रास्ता उसके अतीत को जानने के लिए था, और उसे अब उस रास्ते पर चलना ही होगा।
उसने बिना कोई समय गंवाए, उस रास्ते की ओर कदम बढ़ाया। वह अब यह जानता था कि वह अपने अतीत का सामना करने जा रहा था और जो भी रहस्य अब तक छुपा हुआ था, उसे वह अब जान पाएगा।
क्या राहुल अपनी पहचान को जान पाएगा? क्या वह अपनी यात्रा को पूरा कर सकेगा? और क्या वह अपने पुराने दोस्त से फिर से मिलेगा? ये सवाल अब और भी पेचीदा हो गए थे, और राहुल के लिए उनका जवाब तलाशने की चुनौती भी कठिन होती जा रही थी।
आगे की कहानी पड़ने के लिए लिंक पर क्लीक करे
[Aage ki kahani padhe - Read More]

Comments
Post a Comment